शनिवार 13 जून 2026 - 13:07
इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह की 37वीं बरसी पर ईसाई समुदाय का श्रद्धांजलि अर्पण, अंतरधार्मिक सौहार्द का संदेश

इस्लामी गणराज्य ईरान के संस्थापक हज़रत इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह की 37वीं बरसी के अवसर पर तेहरान के ऐतिहासिक सेंट सरकिस कैथेड्रल में ईरानी ईसाई समुदाय ने एक शोकसभा और स्मरण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें वक्ताओं ने इमाम ख़ुमैनी की सेवाओं को श्रद्धांजलि देते हुए अंतरधार्मिक सम्मान, राष्ट्रीय एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के महत्व पर जोर दिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के ऐतिहासिक सेंट सरकिस कैथेड्रल में इस्लामी गणराज्य ईरान के संस्थापक हज़रत इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह की 37वीं बरसी के अवसर पर ईरानी ईसाई समुदाय द्वारा एक शोकसभा और स्मरण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक हस्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के वक्ताओं ने इमाम ख़ुमैनी की राजनीतिक और सामाजिक सेवाओं को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता, मानवीय गरिमा और विभिन्न धर्मों के बीच आपसी सम्मान जैसे सिद्धांतों को बढ़ावा दिया। उनका कहना था कि इन्हीं मूल्यों के कारण ईरान में विभिन्न धार्मिक समुदायों और अल्पसंख्यकों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ जीवन जीने के अवसर प्राप्त हैं।

वक्ताओं ने ईरान को विभिन्न धर्मों, विचारधाराओं और संस्कृतियों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का एक प्रमुख उदाहरण बताया और कहा कि मुसलमान, ईसाई, यहूदी और अन्य धार्मिक समुदाय राष्ट्रीय एकता और आपसी सम्मान की भावना के साथ देश की प्रगति और स्थिरता में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक विविधता के बावजूद ईरानी राष्ट्र अपने देशप्रेम और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के मामले में एकजुट है।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इमाम ख़ुमैनी को केवल एक राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि न्याय, मानवीय गरिमा और विभिन्न धर्मों व समुदायों के बीच सम्मान के समर्थक के रूप में भी याद किया। उनके अनुसार, इमाम ख़ुमैनी की स्मृति में ईसाई समुदाय की भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि ईरान में विभिन्न धार्मिक वर्ग साझा राष्ट्रीय और मानवीय मूल्यों के आधार पर आपसी सामंजस्य के साथ रहते हैं।

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि धार्मिक विविधता किसी समाज की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी शक्ति बन सकती है, बशर्ते आपसी सम्मान, कानून का पालन और साझा राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जाए।

विश्लेषकों के अनुसार, तेहरान में आयोजित यह कार्यक्रम अंतरधार्मिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और साझा मानवीय मूल्यों के संवर्धन का एक सकारात्मक संदेश है, जो दुनिया के विभिन्न समाजों के लिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और संवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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